आखिर शिकायत क्यों नहीं करती है ? : Web Bharti



मैं कल रात दुकान से जल्दी अपने घर चला आया ! आम तौर पर मैं प्रत्येक दिन रात के 10 बजे तक घर आता हूँ, लेकिन कल रात 7 बजे ही चला आया !

मैंने सोचा आज रात जल्दी ही घर जाकर थोड़ी समय अपने धर्म पत्नी के साथ बातें करने में बिताऊँ और कहीं बाहर खाना खाने के लिए साथ चलूँ !

जब मैं घर आया तो हमारी पत्नी टीवी देख रही थी ! मुझे लगा कि जब तक वो टीवी में सीरियल देख रही है, तब तक मैं कम्प्यूटर पर कुछ कार्य कर लेता हूँ ! मैंने ऐसा ही किया कुछ देर कम्प्यूटर पर कार्य किया, कुछ देर बाद पत्नी मेरे लिए चाय ले कर आई, तो मैं चाय पिता हुआ दुकान का काम करने लगा !

अब मेरे मन में आया कि पत्नी के साथ बैठ कर बातें करूँ और खाना खाने के लिए बाहर जाऊं पर वक्त का तकाजा तो देखिये कब 7 बजे से 11 बज गया पता ही नहीं चला !

पत्नी ने घर में ही टेबल पर खाना लगा दिया, और मैं चुपचाप खाना खाने लगा ! मैंने खाना खाते हुए अपनी पत्नी से कहा हम कुछ खाने के बाद कुछ देर के लिए बाहर टहलने चलेंगे, कुछ देर गप-सप करेंगे इतना सुनते ही पत्नी की ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था !

हमारे खाना खाते समय मेरी पसंद का सीरियल आ गया और मैं खाना खाते-खाते सीरियल में इतना डूब गया कि देखते-देखते सोफे पर ही सो गया !

जब नींद खुली तो सुबह के 3 बज चुके थे ! मुझे बहुत अधिक अफ़सोस हुआ ! मन मैं यह सोच कर जल्दी घर आया की आज अपनी पत्नी के साथ पूरा समय बितायूंगा ! पर अफ़सोस की बात तो यह थी की कब शाम से सुबह हो गया पता भी नहीं चला !

अक्सर ऐसा ही होता है हमारे जीवन में ! हम सोचते कुछ है और होता कुछ है ! हम सोचते है कि जीवन में एक दिन भी अच्छे से जी लेंगे पर हमारे इर्द-गिर्द अनेकों समस्याएं होती है !

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नींद खुलने के बाद सोफे से उठ कर हाथ मुँह धो कर जब बिस्तर पर आया तो देखा की पत्नी दिन भर काम के थकान से सो गयी थी ! मैं चुपचाप कुर्सी पर बैठ कर कुछ सोचने लगा कि इस लड़की से बीस साल पहले जब पहली बार मिला था ! तब उस वक़्त इन्होनें पीले रंग की शूट पहनी हुई थी ! जिसमे बहुत ही सुन्दर लग रही है जो देख कर मैं उससे प्रेम करने लगा और मैंने शादी कर लिया और अपनी पत्नी से एक वादा किया था कि हर सुख-दुःख में, जीवन के हर एक मोड़ पर मैं तुम्हारे साथ रहूँगा !

वो क्या दिन था और आज क्या दिन है - आज मैं सुबह जागता हूँ और सिर्फ काम ही काम में व्यस्त हो जाता हूँ सुबह से लेकर शाम तक दुकान में व्यस्त रहता  हूँ और मेरी पत्नी सुबह जगती है ! सुबह चाय बनाने से लेकर, दिन भर घर का सारा काम करती है फिर भी किसी प्रकार का झिकझिक नहीं करती है ! मैं सुबह सो कर उठते ही दुकान चला जाता हूँ, तो इस बात को मैं अपनी शान समझता हूँ फिर शाम होते ही मेरी पत्नी डिनर की तैयारी में लग जाती है ! मैं देर रात काम कर के घर आता हूँ और खाना खाते हुए हर बार सोचता हूँ कि वो दिन कब आएगा जब जीवन में एक पल अपने परिवार के साथ जी भर के जी सकूँ !

वो लड़की जो कभी भी किसी बात को लेकर शिकायत तक नहीं करती है ! आखिर क्यों कोई शिकायत नहीं करती है ? लेकिन मुझे इस बात पर खुद से बहुत शिकायत है, कि आदमी जिससे सबसे ज्यादा प्यार करता है, सबसे कम उसी की परवाह क्यों करता है, आखिर ऐसा क्यों होता है ? कई बार एहसास होता है कि हम जीवन में अपनों लिए काम कब करते है ? 

मित्रों जीवन बहुत छोटी सी है, उसे यूँ नहीं जाने दीजिये ! हम जीने के पीछे पूरी जिंदगी बर्बाद कर देते है, लेकिन जीते कब है, आप सोचिये क्या हम गाड़ी, टीवी, कम्प्यूटर, कपडे, फ़ोन इत्यादि के लिए जी रहे है आखिर क्यों पूरी जिंदगी इन चीज़ों को ले ले कर अपना पूरा समय इसके पैसे को भरने में बिता देते है ! 

आखिर हम अपने प्यार के साथ समय क्यों नहीं बितातें अपने माता-पिता, भाई-बहन, बच्चों और  सगे-संबंधी को समय क्यों नहीं देते है ! सच तो यह है की जिंदगी में यही तो सबसे बड़ा सुख है, लेकिन हम अपना सुख कहीं और ढूंढ़ते है ! जीवन में अफ़सोस के सहारे जीने से बेहतर यह समझ लेना कि जीवन एक मिटटी में रेट की तरह होती  है, जो कब मिटटी से निकल जाती है ये तो मिटटी को भी पता तक नहीं चल पाता है !


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