व्यपगत का सिद्धान्त (हड़प नीति 1848-1856) : Doctrine of Lapse - अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत की बहुत सारी रियासतों से सहायक संधि को स्वीकार करवा लिया था ! इस सिद्धांत में भारत के बहुत सारी रियासतों ने अपनी मर्जी से सहायक संधि को स्वीकारा था, जबकि कुछ रियासतों से अंग्रेजों ने जबरजस्ती इस संधि को स्वीकार करवाया था ! नमस्कार दोस्तों आज के इस लेख में व्यपगत के सिद्धांत के बारे में प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे !
- व्यपगत का सिद्धांत से तात्पर्य है कि - जब भी किसी भारतीय रियासत में किसी भी शासक/राजा के बाद अगर कोई राजसिंहासन पर बैठता था, तो वह राजा का पुत्र होता था ! लेकिन अगर उस राजा का कोई संतान नहीं होता था, तो वह राजा किसी दूसरे बच्चे को गोद ले लिया करता था, और तब उस बच्चे को अगला राजा बनाया जाता था !
- पुराने समय से चली आ रही इस परम्परा के ऊपर अंग्रेजों ने अपनी हड़प नीति या व्यपगत का सिद्धांत को लागू कर के समाप्त कर दिया !
- हड़प निति को अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कंपनी के जनरल लार्ड डलहौजी के द्वारा लागू किया गया था !
- अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ से भारत में लार्ड डलहौजी ने वर्ष 1848 से 1856 ई. तक गवर्नर जनरल के पद पर पदस्थापित थे !
- हड़प निति को और भी कई नामों से जाना जाता है जैसे कि - व्यपगत का सिद्धांत, हड़प निति, चूक का सिद्धांत, क्योकिं भारत में अंग्रेजों का इस निति को लागू करने का उद्देश्य था, कि भारत के सभी रियासतों को हड़पना !
- गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी जब भारत में गवर्नर जनरल के पद पर पदस्थापित थे ! तब भारत की राजनितिक स्थिति भारतीय रियासत जो की अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के चंगुल से आजाद थी !
- इनमें से कुछ ऐसी रियासतें थी, जिनसे अंग्रेजों ने सहायक संधि को स्वीकार करवाया था और इसके अलावा कुछ ऐसी भी रियासतें थी जो अंग्रेजों से युद्ध में हारने के बाद भी अंग्रेजों पर निर्भर थी !
- व्यपगत का सिद्धांत के अंतर्गत जो भी भारतीय रियासत अंग्रेजों के चंगुल से आजाद थी उसे छोड़कर बाकी सभी रियासत पर अंग्रेजों के द्वारा व्यपगत का सिद्धांत लागू करने का प्रयास किया गया था !
- इस सिद्धांत को जिन रियासतों के राजाओं ने अंग्रेजो की सहायक संधि को स्वीकारा था, उन राजाओं की कोई संतान नहीं थी ! यदि कोई संतान होती भी थी तो वह गोद लिया हुआ था जिसे अंग्रेजी कंपनी राजा नहीं मानते थे !
- इस सिद्धांत के अंतर्गत गोद लिए गए बच्चे का अधिकार सिर्फ राजा की व्यक्तिगत संपत्ति पर ही होगा न की पुरे राज्य की संपत्ति पर ! गोद लिए गए बच्चे को राजा बनाया जाये या नहीं इसका निर्णय अंग्रेजी कंपनी ही तय कर सकती थी !
- इस सिद्धांत का दूसरा नियम था कि - अगर कोई राज्य अंग्रेजों से किसी युद्ध में हार गया हो या फिर वे राज्य अंग्रेजी कंपनी पर निर्भर हो या उस राजा की कोई संतान ना हो जिसके उपरांत अगर वह राजा किसी बच्चे को गोद ले कर उसे राजा बनाने के बारे सोचे तो अंग्रेजी कंपनी सीधे पुरे राज्य पर कब्ज़ा कर लेती थी !
- अंग्रेजों के द्वारा व्यपगत के सिद्धांत के अंतर्गत - सतारा (1848), जैतपुर, उत्तर प्रदेश (1849), संभलपुर,ओडिशा (1849), झाँसी (1853), नागपुर (1854), और भगत, पंजाब (1850) जैसे रियासत पर कब्ज़ा कर लिया था !
- छत्रपति शाहूजी महाराज के द्वारा सन 1674 में सतारा को स्थापित किया गया था जिसे लार्ड डलहौजी की हड़प नीति सिद्धांत के तहत 1848 ई. में कब्ज़ा कर लिया गया था !
- मराठा साम्राज्य भोंसले वंश के राजा शाहजी भोंसले सतारा पर 1848 में शासन कर रहे थे ! राजा शाहजी भोंसलें की कोई संतान नहीं थी जिसके कारण इन्होनें एक बच्चे को गोद लिया था, जिसकी बाद में मृत्यु हो गयी थी ! तद्पश्च्यात अंग्रेजों ने गोद लेने की प्रथा को समस्या बताकर इस हड़प नीति को सतारा पर थोप दिया और सतारा पर कब्ज़ा कर लिया ! इसी स्थान पर अंग्रेजी कंपनी के अधिकार क्षेत्र बॉम्बे प्रेसीडेंसी बना दिया गया !
- हड़प किये गए सभी क्षेत्रों को अंग्रेजी कंपनी के अधिकार क्षेत्रों में मिलाने के बाद जनरल लार्ड डलहौजी 1856 ई. को वापस ब्रिटेन लौट गए थे !
- लार्ड डलहौजी के द्वारा लायी गयी इस हड़प नीति या व्यपगत के सिद्धांत ने पुरे भारतीय रियासतों को बहुत अधिक प्रताडित किया था ! यही कारण है कि अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय रियासतों में राष्ट्रवाद की भावना उत्पन्न हो गयी और यही बाद में 1857 की क्रांति का मुख्य कारणों में से एक कारण बना था !
- 1857 की क्रांति के उपरांत जब ब्रिटिश सरकार ने अंग्रेजों से भारत की राजनितिक सत्ता को छीन कर ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया था ! उसके उपरांत 1859 ई. में ब्रिटिश सरकार के द्वारा इस हड़प नीति को भारत से समाप्त कर दिया !

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