जीवन में असली शांति का क्या अर्थ होता है ? : Motivational Story in Hindi : Web Bharti


Meditation story in hindi

एक राज्य में एक राजा था जिसे चित्रों से बहुत अधिक प्रेम था ! राजा ने एक घोषणा कराई कि जो चित्रकार शांति को दर्शाता चित्र राजा को भेंट करेगा  राजा उसे मुँह माँगा पुरस्कार देगा !

इस घोषणा को सुनकर दूर-दूर से बड़े-बड़े चित्रकारों ने मुँह माँगा पुरस्कार पाने  की लालसा से एक से बढ़ कर एक चित्रों को राजा के समक्ष पेश किया ! राजा ने सभी चित्रों को एक-एक कर के देखना शुरू किया जिसमे से इन्होने दो चित्रों को अलग रखवाया ! अब इन्हीं दोनों चित्रों में से किन्हीं एक को पुरस्कार के लिए चुना जाना था, जिसे मुँह माँगा पुरस्कार मिलता !

पहला चित्र में एक अति सुंदर शांत झील के दृश्य को दर्शाया गया था  ! उस झील का पानी इतना स्वच्छ था कि उसके अंदर की जमीनी सतह तक दिखाई दे रही थी और उसके आस-पास विद्यमान हिमखंडों की छवि को ऐसे दर्शाया गया था मानो जैसे कोई दर्पण उसके समीप रखा हो ! ऊपर की तरफ नीला आसमान था जिसमें गोले के समान सफ़ेद-सफ़ेद तैरता हुआ बादल को दर्शाया गया था ! इस चित्र को अगर कोई भी देखता तो लोग यही कहते की यह चित्र शांति को दर्शाने वाला है और इससे बेहतर कोई चित्र हो ही नहीं सकता है !  

Raja aur Mahatma ki kahani


दूसरे चित्र में पहाड़ को दर्शाया गया था, परन्तु यह बिलकुल ही सूखा, बेजान और वीरान सा था जिसमे पहाड़ों के ऊपर घने गरजते बादल थे जिसमें बिजलियाँ चमक रही थी और घनघोर बारिश होने से नदी उफान पर थी ! तेज हवाओं से पेड़ को हिलते हुए दर्शाया गया था और पहाड़ी के एक और स्थित झरने ने रूद्र रूप धारण किया हुआ था ! इस चित्र को देख कर सभी लोगों के मुँह से एक ही बात निकल रही थी कि इस चित्र में दूर-दूर तक कोई शांति का  दृश्य से कुछ लेना देना ही नहीं है ! इस चित्र में सिर्फ अशांति ही अशांति को दिखाया गया है !

राज महल से बैठे सभी लोग आस्वस्त थे, कि पहले चित्र बनाने वाले को ही पुरस्कार मिलेगा ! तभी राजा अपने सिंहासन से उठ खड़े हुए और घोषणा कि की दूसरे चित्र बनाने वाले चित्रकार को मुँह मांगा पुरस्कार दिया जायेगा ! सभा में बैठे सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए !

इस घोषणा के सुनते ही पहले चित्रकार से रहा नहीं गया और राजा से कहा - महाराज उस चित्र में ऐसा क्या है कि आपने उसे मुँह माँगा पुरस्कार देने का फैसला लिया, जबकि हर किसी के मुख पर मेरे द्वारा बनाये गए चित्र को लेकर शांति का सर्वश्रेस्ठ चित्र कहा जा रहा है !

राजा ने कहा आओ मेरे साथ - पहले चित्रकार को अपने साथ ले कर दूसरे चित्र के समक्ष पहुँचा और बोला "झरने के बायीं और हवा के कारण झुके इस वृक्ष को देखो, उसकी डालियों पर बने घोंसले को देखो ! यह भी देखो की कैसे एक चिड़िया इतनी कोमलता से इतने शांत व प्रेमभाव से अपने बच्चों को भोजन करा रही है !

फलस्वरूप राजा ने वहां उपस्थित सभी लोगों को समझाया की "शांत होने का अर्थ यह नहीं है कि आप ऐसी स्थिति में हो जहाँ कोई शोर-गुल नहीं हो ! जहाँ कोई समस्या नहीं हो ! जहाँ कोई मेहनत नहीं हो ! जहाँ आपकी परीक्षा नहीं हो ! शांति से तात्पर्य है कि आप हर एक प्रकार की व्यवस्था, अराजकता, अशांति के बीच हो कर भी शांत रहें और अपने काम के प्रति केंद्रित रहें, अपने लक्ष्य की ओर हमेशा अग्रसर रहें !

राजा के इतना कहते ही सभी लोग समझ चुके थे की राजा ने इस चित्र को क्यों चुना है !

मित्रों, इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है, की हर कोई अपने जीवन में शांति चाहता है ! परन्तु हम शांति को कोई बाहरी वस्तु समझ लेते हैं और उसे दूर स्थित स्थलों में ढूंढ़ते है, जबकि शांति हमारे भीतर विधमान चेतना है और यह एक कटु सत्य भी है, कि सभी दुःख, दर्द, कष्ट और कठिनाई के बाद भी शांत रहना ही वास्तव में शांति कहलाता है ! 


 

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