वृद्ध व्यक्ति के बातों ने बालक का जीवन बदल दिया : Web Bharti

life success story in hindi

एक गांव में एक सेठ रहता था ! सेठ का एक इकलौता पुत्र था जिसे छोटी सी उम्र में गलत संगतों के कारण अपनी राह भटक गया था ! इस दशा को देख कर सेठ बहुत ज्यादा परेशान रहा करता था, सेठ को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या किया जाए तभी सेठ मंदिर में जा कर ईश्वर से प्रार्थना किया प्रार्थना करने के बाद वहां के पुजारी को अपनी पूरी समस्या बतायी !

मंदिर के पुजारी ने सेठ की सारी बातें सुनी फिर उन्होंने कहा आप कुछ दिनों के लिए अपने पुत्र को मंदिर में भेजिए मैं कोशिश करूँगा आपकी समस्या का समाधान कर पाऊंअगर ईश्वर की इक्षा रही तो सब ठीक हो जायेगा !

सेठ ने अपने पुत्र से कहा की तुम कुछ दिनों तक मंदिर जाओ वहां के पुजारी के साथ थोड़ा वक़्त बिताओ अगर ऐसा नहीं करते हो तो मैं तुम्हे अपने सम्पति से बेदखल कर दूंगा ! घर से मंदिर की दूरी ज्यादा होने के कारण सेठ उसे किराये के पैसे गिन कर के दिया करता था ! इस समस्या से सेठ का पुत्र एक बंदिश में आ गया था !

मंदिर के बाहर एक वृद्ध बैठा करता था, जिसके चेहरे पर एक अजीब सा दर्द था, और वह बालक उस वृद्ध व्यक्ति को रोज देखा करता था ! एक दिन की बात है मंदिर के बाहर उस वृद्ध व्यक्ति को बैठा देख कर उस बालक को एक मस्ती करने की सूझी और वह वृद्ध के पास जा कर हँसने लगा और वृद्ध से पूछा कि तुम यहाँ क्यों बैठा करते हो, लगता है बहुत ही दर्द भरी दास्तान है तुम्हारी !

उस वृद्ध व्यक्ति ने एक बात कहा और उस बात को सुनते ही उस बालक की पूरी जिंदगी बदल सी गयी - वृद्ध ने कहा हाँ बेटा हँस लो आज तुम्हारा समय चल रहा है पर याद रखना की जब समय बदलेगा तो एक दिन कोई ऐसे ही तुम्हारे ऊपर भी हँस रहा होगा ! एक बात सुनो बेटा मेरे चार पुत्र है मैंने दिन रात मेहनत कर के चारों पुत्रों को इस लायक बनाया की आज वे बहुत उचाईओं पर है, आज वे इतनी बड़ी मुकाम पर है, की आज मैं उन्हें दिखाई तक नहीं हूँ ! मैंने अपने जीवन में एक ही सबसे बड़ी भूल की है कि मैंने खुद के बारे में कभी नहीं सोचा और अपने बुढ़ापे के लिए कुछ धन भी बचा कर नहीं रखा इसलिए तो आज मैं इस पराधीनता से भरी जीवन व्यतीत कर रहा हूँ ! आज अगर ये ईश्वर नहीं होते तो आज मुझे मेरे इस बुढ़ापे में सँभालने के लिए कोई नहीं था तब ईश्वर ने ही मुझे संभाला !

वृद्ध के इन शब्दों को सुन कर बालक के हृदय को झकझोर कर रख दिया ! बालक ने कहा मैंने आपके साथ जैसा बुरा व्यवहार किया उसके लिए मुझे क्षमा करें ! बालक ने कहा- आगे जा कर पराधीन न रहूं ये मुझे समझ नहीं आया विस्तार से बता सकतें है !

वृद्ध ने कहा - हे बालक अगर तुम्हे जानने की इक्षा है तो मैं बिल्कुल बतायूंगा सावधान होकर सुनना ! यह मानव रूपी शरीर पराधीनता से बड़ा कोई अभिशाप नहीं है और आत्मनिर्भरता से बड़ा कोई वरदान नहीं है ! अभिशाप की जिंदगी से मुक्ति पाने के लिए कुछ न कुछ जरूर करते रहना चाहिए ! अगर धन शरीर के लिए आवश्यक है तो तपोधन आत्मा के लिए !

अगर हम नियमित साधना से तपोधन को जोड़ेंगे तो आगे की यात्रा बड़ा काम आएगा क्योकिं जब तुम्हारा अंतिम समय आएगा तो इस शरीर का अंत होगा इसके लिए धन बड़ा ही सहायक होगा ! 

एक बात भली भांति याद रखना धन तो केवल यहाँ इस लोक में काम आएगा लेकिन तपोधन यहाँ भी काम आएगा और वहां भी काम आएगा ! यह पूरी बात के सुनते ही बालक का पूरा जीवन बदल गया !   


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