कर्म का फल भोगना पड़ता है : राजा और मंत्री की कहानी : Web Bharti

राजा और मंत्री की कहानी

पुराने समय की बात है एक नगर में एक राजा रहता था ! राजा हमेशा अपने सभी दरबारियों और मंत्रियों की परीक्षा लिया करता था ! एक दिन की बात है राजा ने अपने तीन मंत्रियों को बुलाकर तीनों को आदेश दिया कि वे लोग बगीचे से एक- एक थैला अच्छे-अच्छे फल तोड़ कर लायें ! 

राजा का आदेश का पालन करते हुए तीनों मंत्रियों ने थैला हाथ में लेकर अलग- अलग बाग़ की ओर निकल पड़े ! बाग़ पहुँच कर एक मंत्री ने सोचा कि बाग़ से अच्छे-अच्छे फल तोड़ कर ले जाता हूँ ताकि राजा मुझे पुरुस्कार से सम्मानित करे और ऐसा सोचते हुए अच्छे-अच्छे फल को तोड़ कर अपने थैले में भरता चला गया !

दूसरे मंत्री ने सोचा कि राजा तो कभी फल खाते ही नहीं है, वे तो फल की ओर नजर घुमाते तक नहीं है, ऐसा सोचते हुए इन्होने अच्छा- ख़राब जो भी फल मिला सभी को थैले में डालते चले गए !

तीसरे मंत्री ने सोचा कि क्यों अपना समय नस्ट किया जाये, राजा को सिर्फ भरा हुआ थैला देखना है तो ऐसा सोचकर उसके मन में एक तरकीब सुझा उसने थैले में घास-फूस भर लिया और ऊपर से दो- चार फल भरकर थैले को लेकर राजा के पास चला गया ! 

राजा ने थैले को बिना देखे अपने सैनिकों को आदेश दिया की वे इन तीनों मंत्रियों को एक माह के लिए कारावास में डाल दिया जाये और इन्हे खाने के लिए कुछ भी नहीं दिया जाये इनके द्वारा जो भी फल लाया गया है उसे ही खा कर अपना पेट भर कर गुजारा करे !

अब क्या था तीनों को एक माह के लिए जेल में डाल दिया गया और इन तीनों के पास थैलों के अलावा साथ में कुछ भी नहीं था ! जिस मंत्री ने अच्छे-अच्छे फलों को तोड कर लाया था उसे तो कुछ भी नहीं हुआ और उन्होंने पुरे माह अपने फलों को खाकर आराम से गुजारा कर लिया  ! 

दूसरा मंत्री जिन्होंने अच्छे और खराब फलों को चुन कर लाया था वे अच्छे फलों को चुन-चुन कर खाता लेकिन जल्द ही अच्छे फल ख़त्म हो जाने की वजह से इसने ख़राब फलों का सेवन करना प्रारम्भ किया जिसके वजह से बीमारी से ग्रसित हो गया और बहुत ही मुश्किल से एक माह तक गुजारा कर पाया !

तीसरा मंत्री जिसने बिना सोचे समझे राजा को मुर्ख बनाने के लिए घास- फुस भर कर लाया था उन्हें कुछ ही दिनों में भोजन ना मिलने के कारण प्राण त्याग देना पड़ा !

मित्रों इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है कि हम जीवन में जैसा करते है हमे वही घूमा फिरा कर मिलता है ! जीवन का यह एक कटु सत्य है, कि हमारे कर्मो का फल एक न एक दिन जरूर मिलता है चाहे वह अच्छे कर्म हो या बुरे ! चाहे इस जन्म में या अगले जन्म में हमारा कर्म हमारा पीछा नहीं छोड़ता ! एक बहुत ही अच्छी कहावत है, कि जो जैसा बोता है वह वैसा ही फल काटता है ! अगर हमने जीवन में बबूल के पेड़ को लगाया है, तो उसके बदले हमे आम खाने को नहीं मिल सकता ! हमें तो सिर्फ कांटे ही कांटे मिलने वाले है !

अर्थात अगर हमने जीवन में किसी के साथ कोई गलत किया है या फिर किसी को दुःख पहुंचाया है या किसी के साथ बुरा-बर्ताव किया है, किसी को धोखा दिया है तो हम कभी भी सूख-चैन से नहीं रह सकते है ! जीवन में हमेसा ही किसी न किसी समस्याओं से घिरे रहेंगें ! हमारे कर्मों का परिणाम जीवन में भोगना ही होगा ! 


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