गुरु के बिना जीवन में ज्ञान नहीं मिलता (गुरु और शिष्य की कहानी)

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एक समय की बात है, किसी नगर में एक बहुत ही प्रभावशाली मठाधीश रहता था ! उनके पास शिक्षा लेने के लिए कई शिष्य आते थे ! एक दिन की बात है एक शिष्य ने अपने गुरु से एक प्रश्न किया कि गुरूजी आपके गुरु कौन है ? आपने अपनी शिक्षा किन गुरु से प्राप्त की है ? गुरूजी शिष्य का प्रश्न सुन कर मुस्कुराने लगा और बोला कि मेरे हजारों गुरु रहें है ! अगर मैं उनके नामों की गणना करने लग जायूँ तो शायद महीनों महीना लग जायेगा लेकिन फिर भी इनमे से अपने तीन गुरुओं के बारे में बताना चाहूंगा जिससे मैं बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुआ !

1. पहला गुरु "चोर" था 

एक बार की बात है मैं किसी काम से एक नगर जा रहा था, लेकिन मैं रास्ता भटक गया और किसी गांव में पहुंच गया ! बहुत रात हो चुकी थी, जिसके कारण सभी दुकान और घर बंद हो चुका था ! आखिरकार मैंने एक आदमी देखा जो एक घर के दिवार में सेंध लगा रहा था जब मैंने उनसे पूछा कि मुझे ठहरना है कहीं ठहरने की जगह मिल सकती है ! तो उसने बोला की इतनी रात हो गयी है, इस समय आपको कहीं भी ठहरने के लिए जगह मिलना मुश्किल है ! लेकिन अगर आपको कोई संकोच नहीं होगा तो आप मेरे साथ ठहर सकते हो लेकिन हाँ मैं पेसे से चोर हूँ अगर आपको एक चोर के साथ समय बिताने में कोई परेशानी नहीं होगी तो आप मेरे साथ रात बिता सकते है ! 

वह बहुत ही ईमानदार व्यक्ति था, उनका स्वभाव बहुत ही अच्छा था जिसके कारण मै उनके साथ एक महीनें तक रह गया ! वह व्यक्ति हर रात मुझसे कहता था की मैं अपने काम पर जाता हूँ, आप अपना ख्याल रखना और आराम कीजिए यह कह कर चला जाता !  जब वह व्यक्ति काम कर के आता तो मैं उनसे पूछता था की आज तुम्हें कुछ मिला ? तब वह मुझसे कहता की आज कुछ नहीं मिला तो क्या हुआ अगर ईश्वर ने चाहा तो जल्द ही कुछ न कुछ जरूर मिलेगा लेकिन वह कभी उदास नहीं होता था, हमेशा मस्ती-मिजाज में रहता था !

इनसें मैंने जीवन में बहुत ही अनमोल बातें सीखी की जब भी मैं वर्षों तपस्या-साधना में बीतता और मुझे कोई भी ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो पाती तब ऐसे समय मैं कई बार हताश होकर साधना तपस्या को छोड़ लेने की ठान लेता था लेकिन तभी मुझे उस चोर के बारे में याद आ जाता था जो हर रोज कुछ नहीं मिलने के बाद भी यही कहा करता था की अगर भगवान ने अगर किसी दिन चाहा तो जरूर कुछ न कुछ मिलेगा ! यह बात मुझे अपने ध्यान-साधना में बहुत ही ऊर्जावान बना देता था !

2. दूसरा गुरु एक ''कुत्ता" था !

एक समय की बात है जब मैं गर्मी के दिन में कहीं यात्रा कर रहा था तभी बहुत जोर से प्यास लग गयी और दूर-दूर तक पानी की तलाश में घूमता फिर रहा था लेकिन कहीं भी पानी नहीं दिखाई दे रहा था ! तभी वहां एक कुत्ता दौड़ता हुआ आया और वह भी गर्मी के मारे बहुत प्यासा था ! पानी की तलाश में खोजते-खोजते पास में एक नदी दिखाई दिया ! कुत्ते ने नदी में झांक कर देखा तो कुत्ते को अपनी परछाई दिखाई दिया कुत्ते ने उस परछाई को दूसरा कुत्ता समझ कर बहुत ही डर गया और परछाई को दूसरा कुत्ता मान कर उसपर भोंकने लगा और पीछे हट गया लेकिन प्यास के कारण बार-बार पानी के नजदीक जाता और पानी पिये बिना वापस लौट आता ! अंततः डर के बाबजूद भी वह प्यास बुझाने के लिए नदी में कूद गया उसके कूदते ही पानी से परछाई गायब हो गया ! तभी इस कुत्ते की साहस को देख कर मुझे बहुत बड़ी शिक्षा मिली की जो व्यक्ति अपने डर पर काबू कर ले और डर के बाबजूद भी छलांग लगा ले तो उसे जीवन में सफलता जरूर मिलेगी !

3. तीसरा गुरु एक छोटा "बालक" था !

एक समय की बात है जब मैं एक गांव से गुजर रहा था तभी मैंने देखा की एक छोटा सा बालक एक जलती हुई मोमबत्ती को ले कर पास के किसी गिरजाघर में रखने जा रहा था ! तभी मैंने मजाक से उनसे पूछा की ये मोमबत्ती तुमने जलाई है ? वह बालक बोला जी हाँ मैंने ही जलाई है ! तभी मैंने कहा एक क्षण पहले जब यह मोमबत्ती बुझी हुई थी लेकिन फिर एक क्षण आया की जब यह मोमबत्ती जल गयी ! क्या तुम मुझे वह स्त्रोत बता सकते हो कि जहाँ से वह ज्योति इसमें आयी है ?

इस बात से वह बालक हँसने लगा और मोमबत्ती को फूंक कर बुझा दिया और बोला अब आप मुझे बताईये की यह ज्योति कहाँ चली गयी ? आप मुझे दिखा सकते है ?

इस बात के सुनते ही मेरा अहंकार का चकनाचूर हो गया, मेरा ज्ञान जाता रहा और उस क्षण मुझे अपनी मूर्खता का अहसास हुआ !

मित्रों इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है की जीवन में हर पल हर समय हमे सिखने को तैयार रहना चाहिए ! जीवन का हर क्षण हमें कुछ न कुछ सिख-सिखने का मौका देता है ! हमें जीवन में हमेशा एक शिष्य बनकर हर किसी से कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए ! यह जीवन हमें हर दिन किसी न किसी रूप में किसी गुरु से मिलाता है, लेकिन यह हम पर निर्भर करता है की हमने किनसे क्या सीखा !


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